Bhagat singh biography In hindi | भगत सिंह जीवन परिचय

आज की इस पोस्ट में आपको the legend bhagat singh jivani, Bhagat singh biography In hindi, भगत सिंह जीवन परिचय के बारे में बताया है, Bhagat Singh भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक माने जाते है।

Bhagat singh biography In hindi

आज हम भगत सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें और उनके लिखे कुछ स्लोगन आपको बताने जा रहे हैं, आप सभी लोग भगत सिंह को अच्छे से जानते होंगे वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं बल्कि लोगों के आइडियल भी है,

यदि आप भगत सिंह के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारी इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

Contents

Bhagat Singh Wiki | Bhagat Singh biography In Hindi

नामभगत सिंह
जन्म दिनांक28 सितंबर 1907
जन्म स्थानग्राम बंगा, तहसील जरनवाला,
जिला लायलपुर, पंजाब
पिता का नामकिशन सिंह
माता का नामविद्यावती कौर
स्कूल-कॉलेजडी.ए.वी. हाई स्कूल, लाहौर, नेशनल कॉलेज, लाहौर
संगठनकीर्ति किसान पार्टी,
नौजवान भारत सभा,
क्रांति दल,
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन
राजनीतिक विचारधारासमाजवाद, राष्ट्रवाद
मृत्यु स्थानलाहौर
मृत्यु तिथि23 March 1931
स्मारकद नेशनल शहीद मेमोरियल,
हुसैनवाला, पंजाब

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भगत सिंह का जन्म कब और कहां हुआ? | Bhagat singh date of birth

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 ग्राम बंगा, तहसील जरनवाला, जिला लायलपुर, पंजाब में हुआ था।

भगत सिंह का परिवार | Bhagat Singh family

भगत सिंह के पिता का नाम किशन सिंह था और इन के चाचा का नाम अजीत सिंह था, भगत सिंह के पिता और चाचा दोनों ही देशभक्त थे, भगत सिंह की मां का नाम विद्यावती था, भगत सिंह का जन्म सिख परिवार के अंदर हुआ था।

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भगत सिंह की शिक्षा | Information on bhagat singh

भगत सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल से पूरी की है, उसके बाद उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज से BA की डिग्री हासिल की, उस दौरान उनकी मुलाकात सुखदेव थापर, भगवती चरन और भी अन्य लोगों से हुई,

आजादी की लड़ाई उस समय चरण सीमा पर थी और देश प्रेम अधिक होने के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में छोड़कर आजादी की लड़ाई में कूद जाना उचित समझा।

भगत सिंह जलियांवाला बाग हत्याकांड से बहुत ही दुखी थे और उन्होंने बहुत ही कम उम्र में गांधीजी के द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन का जमकर प्रदर्शन किया और वे खुलेआम अंग्रेजों को ललकारा करते थे। गांधी जी ने चौरी चौरा घटना के बाद असहयोग आंदोलन को बंद करने का फैसला लिया था,

जिस वजह से भगत सिंह खुश नहीं थे तब उन्होंने गांधी जी के अहिंसक कार्रवाई से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद वे युवा क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े और यहां से उनकी ब्रिटिश राज के खिलाफ हिंसक विद्रोह की यात्रा शुरू हुई।

इसी वक्त भगत सिंह के परिवार वाले उनके विवाह के लिए बात कर रहे थे लेकिन भगत सिंह ने विवाह करने से मना कर दिया था और कहा था कि “अगर मैं शादी करूँ, तो मेरी दुल्हन मौत होगी।”

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भगत सिंह के दिल में देशभक्ति की भावना कैसे जगी?

भगत सिंह का जन्म एक सिख परिवार में हुआ था जिस वक्त इनका जन्म हुआ तब इनके पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह दोनों ही जेल में बंद थे इनके चाचा बहुत बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, जिन्होंने भारतीय देशभक्ति एसोसिएशन भी बनाई थी।

भगत सिंह ने अपने बचपन से ही घरवालों के मन में देशभक्ति की भावना देखी थी और उनके अंदर देशभक्ति की भावना उनके घर से ही उत्पन्न हुई।

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राष्ट्रीय आंदोलन और क्रांतिकारी गतिविधियाँ में योगदान

भगत सिंह के परिवार वालों ने जब उन्हें विश्वास दिला दिया कि वह उनकी शादी के बारे में नहीं सोचेंगे तब भगत सिंह वापस अपने घर लाहौर लौट आए थे उसके बाद उन्होंने कीर्ति किसान पार्टी के लोगों से बातचीत करके उनकी मैगजीन “कीर्ति” के लिए काम करना शुरू किया।

वह इस मैगजीन के द्वारा नौजवानों तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश करते थे, भगत सिंह बहुत ही अच्छे लेखक थे। वर्ष 1926 में भगत सिंह को नौजवान भारत सभा में सेक्रेटरी का पद दिया गया।

इसके बाद वे वर्ष 1928 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से जुड़े, जो कि मौलिक पार्टी थी, इसे चन्द्रशेखर आजाद ने बनाया था। भगत सिंह ने अपनी पूरी पार्टी के साथ मिलकर भारत में आए सइमन कमीशन का जमकर विरोध किया और इस विरोध में उनके साथ लाला लाजपत राय भी शामिल थे।

भगत सिंह और उनके साथी ने “साइमन वापस जाओ” का नारा लगाते हुए लाहौर स्टेशन पर ही खड़े रहे जिसके बाद वहां पर लाठीचार्ज हुआ और लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। लाला जी की मृत्यु से भगत सिंह काफी आघात हुए और उन्होंने अंग्रेजों से बदला लेने की ठान ली थी।

भगत सिंह ने ऑफीसर स्कॉट को मारने की योजना बनाई लेकिन भूल से उनके हाथों असिस्टेंट पुलिस सौन्देर्स का क़त्ल हो गया और अपने आप को बचाने के लिए वे लाहौर छोड़ तुरंत ही भाग निकले लेकिन अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए चारों तरफ जाल बिछाया था।

इसके बाद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और राजदेव व सुखदेव साथ मिल चुके थे और तीनों ने मिलकर कुछ बड़ा धमाका करने का सोचा। इस बार उन्होंने फैसला लिया कि वे भागेंगे नहीं बल्कि अपने आप को पुलिस के हवाले करेंगे।

वर्ष 1929 में भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने मिलकर ब्रिटिश सरकार की असेंबली बम ब्लास्ट किया जो कि सिर्फ आवाज करने वाला बम था और साथ ही उन्होंने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए और कुछ पर्चे बांटे और फिर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।

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भगत सिंह को फांसी | Bhagat Singh Death

भगत सिंह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, मात्र 23 साल की उम्र में वे शहीद हो गए थे। वर्ष 1931 मार्च 23 को उन्हें और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव को लाहौर जेल में फांसी की सजा सुनाई गई।

तीनों ने अपने मनपसंद नारे “इंकलाब जिंदाबाद” व “ब्रिटिश साम्राज्यवाद के साथ नीचे” का उच्चारण करते हुए फांसी के लिए काफी ज्यादा खुश थे। भगत सिंह और उनके साथियों का अंतिम संस्कार सतलज नदी के तट पर हुसैनीवाला में किया गया था।

फिल्मे और नाट्य रूपांतरण | Bhagat Singh Movie

भगत सिंह ने हम भारतीयों को जो प्रेरणा दी है वह फिल्मों की लोकप्रियता और उनके जीवन पर नाट्य रूपांतरण में महसूस की जा सकती है, वर्ष 2002 में आई फिल्म “द लीजेंड ऑफ भगत सिंह” और वर्ष 1965 में आई फिल्म “शहीद” जैसी कई फिल्म 23 वर्ष कांतिकारी भगत सिंह के जीवन पर बनी है।

उनके जीवन से जुड़ी विचारधारा और विरासत के बारे में हमें कई लेख, किताबे और पत्र लिखे मिलते हैं।

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भगत सिंह अनमोल वचन | Bhagat singh quotes in hindi

  • मेरी गर्मी के कारण राख का एक-एक कण चलायमान हैं मैं ऐसा पागल हूँ जो जेल में भी स्वतंत्र हैं।
  • किसी को “क्रांति” को परिभाषित नहीं करना चाहिए। इस शब्द के कई अर्थ एवम मतलब हैं जो कि इसका उपयोग अथवा दुरपयोग करने वाले तय करते हैं।
  • जो व्यक्ति उन्नति के लिए राह में खड़ा होता हैं उसे परम्परागत चलन की आलोचना एवम विरोध करना होगा साथ ही उसे चुनौति देनी होगी।
  • कोई व्यक्ति तब ही कुछ करता हैं जब वह अपने कार्य के परिणाम को लेकर आश्वस्त होता हैं जैसे हम असेम्बली में बम फेकने पर थे।
  • जीवन अपने दम पर चलता हैं दूसरों का कन्धा अंतिम यात्रा में ही साथ देता हैं।

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FAQ’s

Q1: भगत सिंह का नारा क्या है?

Ans: भगत सिंह का पसंदीदा नारा इंकलाब जिंदाबाद था जिसका अर्थ है कि मेरे खून का एक-एक कतरा कभी तो इंकलाब लाएगा।

Q2: भगत सिंह का दूसरा नाम क्या है?

Ans: भगत सिंह की दादी ने उनका नाम भागां वाला रखा था लेकिन बाद में उनका नाम भगत सिंह रखा गया।

Q3: भगत सिंह ने कहां तक पढ़ाई की थी?

Ans: भगत सिंह ने स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी।

Q4: भगत सिंह को फांसी क्यों दी गई थी?

Ans: वर्ष 1928 में भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ब्रिटिश जूनियर पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स को गोली मारकर हत्या कर दी थी और फिर उसके बाद सेंट्रल एसेंबली में बम फेंक दिया जिसके लिए उन्हें फांसी की सजा हुई थी।

Q5: सरदार भगत सिंह का जन्म कब और कहां हुआ था?

Ans: भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 ग्राम बंगा, तहसील जरनवाला, जिला लायलपुर, पंजाब में हुआ था।

Q6: भगत सिंह ने देश के लिए क्या-क्या किया था?

Ans: भगत सिंह ने अपने देश की आजादी के लिए बहुत से योगदान दिए हैं और वे भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी भी माने जाते हैं।

Q7: भगत सिंह ने जेल में कौन सी पुस्तक लिखी?

Ans: भगत सिंह जिस वक्त जेल में थे उन्होंने एक डायरी लिखी थी जिसे भगत सिंह जेल नोटबुक के नाम से जाना जाता है।

Q8: गांधी जी ने भगत सिंह के लिए क्या कहा था?

Ans: महात्मा गांधी ने कहा था कि मैंने फांसी को रोकने की हर मुमकिन कोशिश की है लेकिन मेरी हर कोशिश नाकाम रही।

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Conclusion: निष्कर्ष

आज के इस पोस्ट में हमने आपको Bhagat Singh biography In Hindi, Bhagat Singh Quotes के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी है, हमें उम्मीद है आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा,

यदि आपके मन में भगत सिंह के जीवन को लेकर कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट बॉक्स के जरिए पूछ सकते हैं, धन्यवाद।

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