Bhoot ki kahani in hindi: सत्य घटनाओं पर आधारित 3 सबसे भयानक भूत की कहानियां

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आप में से काफी कम लोग भूत-प्रेतों के ऊपर विश्वास करते होंगे, पर आज के इस लेख को पढ़ने के बाद कहीं ना कहीं आप भी भूत प्रेतों के ऊपर विश्वास करने लगेंगे क्योंकि आज के इस लेख में हमने आपको भूतों की 3 ऐसी कहानियां बताएं हैं, जो कि कुछ हद तक सच्ची घटनाओं से मिलती जुलती है पर पूरी तरह से सत्य नहीं है।

अगर आपका दिल कमजोर है तो आपको हमारे इस लेख को नहीं पढ़ना चाहिए, पर यदि आप भूत प्रेतों को नहीं मानते हैं या भूत-प्रेतों पर विश्वास नहीं करते हैं और ऐसे में आपको भूत प्रेतों से बिल्कुल भी डर नहीं लगता है तो आपके लिए हमारी यह पोस्ट काफी ज्यादा रोमांचक होने वाली है।

दोस्तों आज के इस लेख में हमने आपके साथ top 3 bhoot ki kahani, bhoot pret ki kahani hindi mein साझा की है, जिन्हें आपको एक बार पूरा अवश्य पढ़ना चाहिए। तो चलिए darawni bhoot ki kahani की तरफ आगे बढ़ते हैं।

Bhoot ki kahani in hindi

No 1: कब्रिस्तान पर बना अस्पताल

आज की हमारी यह कहानी उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकाश नामक एक व्यक्ति की है जोकि उत्तर प्रदेश के एक प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टर के पद पर नियुक्त था, दोस्तों यह बात साल 2008 की है जब आकाश अस्पताल में काम किया करता था।

अस्पताल में 1 दिन एक इमरजेंसी केस के आने पर आकाश को रात्रि के समय अस्पताल में बुलाया गया, और फिर जब आकाश अस्पताल में मरीजों को देखने के बाद वापस घर की तरफ लूटने लगा तो उसने घड़ी में समय देखा तो उस वक्त रात के 2:00 बज चुके थे,

ऐसे में उसने सोचा कि अभी रात के 2:00 बज चुके हैं और इस समय घर जाना ठीक नहीं होगा, तो उसने अपने अस्पताल के ऑफिस में ही रुकने का फैसला किया, और आकाश अपने ऑफिस में जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ गया और अपना मोबाइल चलाने लगा,

अचानक आकाश को लगा कि उसके पीछे कोई खड़ा है, और उसके हाथ पैरों के रोंगटे भी खड़े हो चुके थे ऐसे में उसने मुड़कर देखा तो उसके पीछे उसे कोई भी दिखाई नहीं दिया, पर बार-बार उसको यह एहसास हो रहा था कि उसके पास जरूर कोई ना कोई खड़ा है और वह उसे लगातार देख रहा है।

आकाश भूत-प्रेतों के ऊपर विश्वास नहीं करता था, इसलिए उसने इसे अपना एक वहम समझा और अपने हाथ मूंह धोकर कुछ देर सोने के लिए वही लेट गया, कुछ देर बाद उसे जब नींद आने ही लगी थी तब उसे किसी की पायल की आवाज सुनाई दी, 

और उसने देखा तो उसके ऑफिस के गेट के बाहर किसी की परछाई दिखाई दी, उस परछाई को देखकर आकाश उसके पीछे उसे देखने चला गया, जैसे ही उसने अपने ऑफिस का दरवाजा खोला और बाहर निकला तो वहां काफी ज्यादा अंधेरा था, और पूरे अस्पताल में उसे उसके अलावा कोई और नजर नहीं आ रहा था।

साथ ही जो कल तक एक अस्पताल हुआ करता था वह उसे आज एक किसी खंडर से कम नहीं लग रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ यह क्या हो रहा है, ऐसे में उसे जो पायल की आवाज सुनाई दे रही थी वह उसका पीछा करते हुए, अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर जा पहुंचा।

अस्पताल के एक कमरे से कुछ लोगों की बात करने की आवाज सुनाई दी जिसे सुनकर उसे लगा कि अब मैं सुरक्षित हूं और अस्पताल में मेरे अलावा और भी लोग हैं, ऐसे में आकाश उन वादों का पीछा करते हुए एक कमरे के अंदर दाखिल हो गया, जैसे ही आकाश कमरे में घुसा तो कमरे का दरवाजा अपने आप ही बंद हो गया,

कमरे के अंदर उसने देखा कि उसके सामने बिना सिर वाले कुछ लोग खड़े हैं, और सभी आपस में एक दूसरे से बात भी कर रहे हैं, यह देख आकाश पूरी तरह से घबरा गया और जोर जोर से चिल्लाने लगा, बचाओ बचाओ। पर वहां उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था और फिर आकाश डर कर दरवाजे को जोर जोर से बजाने लगा और कहने लगा बचाओ बचाओ।

कुछ देर बाद उस कमरे का दरवाजा खुला और उसे अपने सामने उस अस्पताल का वॉचमैन नजर आया, वॉचमैन काफी बुजुर्ग था, जिसने आकाश की आवाज सुनकर दरवाजा खोला था, आकाश ने उस बुजुर्ग व्यक्ति को देखकर उसके पैर पकड़ लिए और जोर जोर से रोते हुए कहने लगा मुझे बचा लो वरना यह सब मुझे मार डालेंगे।

आकाश को रोता देख वॉचमैन ने उसे शांत कराया और उसे दिलासा दिया कि तुम बिल्कुल ठीक हो और इस कमरे में भी कोई भी नहीं है, कुछ देर बाद आकाश शांत हुआ और उसने मुड़कर कमरे में देखा तो वहां कोई भी नहीं था और जो अस्पताल उसे कुछ वक्त पहले खंडन नजर आ रहा था वह फिर से एक साफ सुथरा अस्पताल बन चुका था।

इसके बाद आकाश ने अपनी आपबीती उस बुजुर्ग व्यक्ति को सुनाई तो उस बुजुर्ग व्यक्ति ने आकाश से कहा कि हो सकता है तुमने जो देखा वह सत्य हो, क्योंकि मैं इस अस्पताल में पूरे 30 वर्षो से काम कर रहा हूं, और यहां अस्पताल बनने से पहले एक कब्रिस्तान हुआ करता था। 

जिसके कारण हो सकता है तुम्हें यह सब दिखाई पड़ा हो, क्योंकि मुझे भी रात के समय अस्पताल के अंदर से काफी अजीब अजीब आवाजें आती है, तब आकाश ने कहा कि मैं तो भूत-प्रेतों को मानता ही नहीं हूं पर आज यह सब देखने के बाद मुझे यह पूरी तरह से विश्वास हो गया है कि सचमुच भूत प्रेत होते हैं।

थोड़ी देर आकाश बुजुर्ग व्यक्ति के पास बैठा और फिर वह अपने घर वापस लौट गया, पर आज भी आकाश को वह दृश्य पूरी तरह से याद है और वह उसे जब भी याद करता है तो आज भी वह डर से कांपने लगता है।

दोस्तों यह बात कितने सत्य है और कितनी छूट यह हम नहीं कह सकते पर यह एक सत्य घटना है जो कि उत्तर प्रदेश के आकाश के साथ घटित हुई है आपकि इसके ऊपर क्या राय है हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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No 2: भूतों ने की रोड पर नाकाबंदी

आज से सही 10 से 12 वर्ष पहले दो दोस्त रोहित और ओमप्रकाश देर रात पार्टी करके काफी ज्यादा शराब पीकर अपनी मोटरसाइकिल से एक सुनसान रास्ते से होते हुए अपने घर की तरफ जा रहे थे।

उन्होंने इतनी ज्यादा पी रखी थी कि मुझे अपनी गाड़ी भी सीधी नहीं चल रही थी, दोनों दोस्तों में से ओमप्रकाश गाड़ी चला रहा था और रोहित पीछे बैठा था, रोहित ओमप्रकाश से लगातार कह रहा था कि यार तुम गाड़ी बहुत धीरे चला रहे हो तुम मुझे चलाने दो मैं जल्दी ही तुम्हें घर पहुंचा दूंगा।

ओमप्रकाश थोड़ा समझदार था तो उसने समझदारी करते हुए कहा कि नहीं हम लोगों ने काफी ज्यादा पी रखी है ऐसे में अगर हम गाड़ी तेज चलाते हैं तो हमारा एक्सीडेंट हो जाएगा, इस तरह वह दोनों बात करते हुए रोड पर चले जा रहे थे, कुछ दूर आगे जाने के बाद रोहित ने ओमप्रकाश से कहा कि “रुक-रुक आगे देख आगे नाकाबंदी लगी है”,

यह सुनकर ओमप्रकाश ने अपनी गाड़ी रोक ली और उसने आगे देख कर कहा कि हां नाकाबंदी तो है पर यहां कोई पुलिस वाला नजर नहीं आ रहा है हो सकता है सारे पुलिस वाले कहीं जाकर सो गए हो, और यह अच्छा मौका है हम चुपचाप यहां से निकल जाते हैं।

ओमप्रकाश ने अपनी गाड़ी फिर से स्टार्ट की ओर आगे बढ़ गया, थोड़ा आगे जाते ही उन्हें नाकाबंदी पर दो पुलिस वाले खड़े नजर आए जिन्हें देख उन्होंने फिर से अपनी गाड़ी ढोकली और ओमप्रकाश ने रोहित से कहा कि यार यहां तो दो पुलिस वाले खड़े हैं अगर इन्होंने हमें इस हालत में पकड़ लिया तो हमारे काफी ज्यादा डंडे लगेंगे और हमारी गाड़ी भी जब हो जाएगी।

ऐसे में रोहित ने कहा कि तुम अपनी गाड़ी किसी और दूसरे रोड से घुमा लो हम अब इस रोड से नहीं जाएंगे, तो यह सुनकर ओमप्रकाश ने अपनी बॉडी को घुमा लिया और दूसरी ओर से घर की तरफ निकल पड़ा, पर कुछ देर दूर जाने पर उन्हें दूसरे रोड पर भी नाकाबंदी नजर आई और जब उन्होंने गौर से देखा तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि इस रोड के ऊपर भी उन्हें वही दो पुलिस वाले नजर आए,

जो पहले वाली नाकाबंदी पर उन्हें दिखे थे, यह देखना दोनों काफी ज्यादा डर गए और वह इतने ओमप्रकाश से कहा कि जरूर यहां कुछ उल्टा चक्कर है और हम किसी गलत जगह फंस गए हैं तू जल्दी से अपनी गाड़ी घुमा नहीं तो आज दोनों मारे जाएंगे।

यह सुनकर ओमप्रकाश के भी पसीने छूट गए और उसने फिर से अपनी गाढ़ी कमाई और तीसरे रोड़ की तरफ अपना रुख कर लिया, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और रोहित और ओमप्रकाश को तीसरे रोड पर भी नाकाबंदी मिली और जिस पर भी उन्हें वही तो पुलिसवाले नजर आए जो कि उन्हें पहली और दूसरी नाकाबंदी पर नजर आए थे।

यह देखकर उन्होंने फिर से अपनी गाड़ी घुमाई और रोड के चौराहे पर आकर रुक गए, ओमप्रकाश ने रोहित से कहा कि आज हमारे साथ क्या हो रहा है तीनों रोड पर ये 2 पुलिस वाले ही हमें क्यों नजर आ रहे हैं, हमने जितनी शराब पी थी वह सारी की सारी अब पूरी तरह से उतर गई है।

इसके बाद रोहित ने ओमप्रकाश से कहां थी मुझे लगता है वह कोई इंसान नहीं बल्कि कोई भूत है जो हमारे पीछे पड़ चुके हैं, अब हम कैसे बचेंगे क्योंकि हम जिस भी दिशा में जा रहे हैं वह हमें हर दिशा में मिल रहे हैं। यह सुनकर ओम प्रकाश ने कहा कि हमें इस चौराहे पर ही रुक जाना चाहिए क्योंकि आगे अगर हम गए और भूतों ने हमें पकड़ लिया तो वह हमें कच्चा ही खा जाएंगे।

इसके बाद वह दोनों उस चौराहे पर ही रुक गए और एक साइड अपनी बाइक लगाकर पास में एक पेड़ के नीचे बैठ गए, दोनों के ही डर से पसीने छूट रहे थे और हाथ पैर काट रहे थे दोनों ही एक दूसरे की तरफ देखे ही जा रहे थे, ऐसे में वहां पर जंगली जानवरों की भी लगातार आवाजें आ रही थी तो रोहित ने ओमप्रकाश से कहा कि अगर हम गाड़ी लेकर आगे बढ़े तो भूत हमें मार डालेंगे।

और अगर यही बैठे रहे तो इस जंगल के जंगली जानवरों में आ कर खा जाएंगे, आज तो दोनों ही तरफ से हमारा मरना पक्का है, ओमप्रकाश ने रोशनी से कहा कि तू बिल्कुल भी डर मत कुछ ही घंटों में सुबह हो जाएगी फिर हम अपने घर निकल जाएंगे।

यह कहकर वह दोनों एक दूसरे के कंधे पर सिर रखकर वही सो गए, सुबह होने पर वहां कुछ गांव वाले खड़े हुए और उन्होंने देखा कि दो नौजवान लड़के एक नीम के पेड़ के नीचे सो रहे हैं और पास में एक गाड़ी भी खड़ी है, यह देख मैं से एक गांव के बुजुर्ग ने उन दोनों को उठाया और उनसे पूछा कि आप लोग कहां से हो और यहां क्या कर रहे हो।

ओमप्रकाश और रोहित ने अपने पास खड़े लोगों को देख कर चैन की सांस ली और वह दोनों जोर जोर से रोने लगे, उन्हें रोता देख गांव वालों ने उन्हें चुप कराया और उनसे पूछा कि क्या हुआ तुम ऐसे ही क्यों रो रहे हो, इसके बाद ओमप्रकाश और रोहित ने गांव वालों से अपनी आपबीती कहीं तो गांव वालों ने उनसे कहा कि तुम दोनों बहुत ही खुश नसीब हो जो तुम आगे ना बढ़ कर यहीं आकर बैठ गए वरना आज तुम दोनों जिंदा नहीं होते।

क्योंकि इस रोड के ऊपर काफी भयानक भूतों का साया है जो कि लोगों की जान लेता रहता है, आज तक कोई नहीं बचा है तुम दोनों पहले इंसान हो जो मौत के मुंह से वापस निकले हो। इसके बाद ओम प्रकाश पुरोहित कुछ देर उस गांव में रुकने के बाद वहां से अपने घर के लिए रवाना हो गए।

दोस्तों यह कहानी कितनी सत्य है और कितनी झूठी है यह आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं आपको क्या लगता है क्या सचमुच ओम प्रकाश पुरोहित के साथ ऐसा हुआ होगा।

हम उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख काफी ज्यादा पसंद आ रहा होगा, इसे आप अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कर सकते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हमारी वेबसाइट से जुड़ सके और उन्हें भी यह कहानी पढ़ने को मिले।

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No 3: चुड़ैल ने किया पीछा

राजस्थान के अंदर एक भिगोता नामक गांव में एक रामस्वरूप नाम का व्यक्ति रहता था, जो कि भिगोता गांव का सरपंच था, रामस्वरूप के सरपंच होने के कारण उसे आसपास के गांव से अक्सर छोटे बड़े, अच्छे बुरे कामों में न्योता देकर बुलाया जाता था,

और 1 दिन दूरदराज गांव की शादी में रामस्वरूप गया हुआ था, जहां उसे रात को काफी ज्यादा देर हो गई थी और उसके पास अपने घर वापस जाने के लिए कोई साधन भी मौजूद नहीं था, गांव वाले रामस्वरूप को सरपंच साहब कह कर संबोधित करते थे और उनका सभी काफी ज्यादा आदर करते थे।

गांव वालों ने उन्हें रात ज्यादा होने पर रुकने को कहां पर वह नहीं रुके, उन्होंने कहा कि नहीं मुझे अभी गांव वापस लौटना ही होगा, ऐसे में गांव वालों ने उन्हें भेंट के रूप में शादी के लड्डू बांध कर दे दिए जिन्हें लेकर रामस्वरूप अपने गांव की तरफ लौट गए,

रामस्वरूप लड्डू लेकर खेतों के बीच से कच्चे रास्ते से होते हुए अपने घर वापस लौट रहे थे, तभी रास्ते में उन्हें अपने पीछे से एक आवाज सुनाई दी जो कि किसी औरत की थी, वह कह रही थी कि “रामस्वरूप रुक जाओ मुझे बहुत भूख लगी है मुझे अपने लड्डू देकर जाओ”।

यह सुनकर रामस्वरूप के पसीने छूट गए थे, क्योंकि वह सोच में पड़ गए कि आखिर इसको कैसे पता कि मैं अपने साथ लड्डू लेकर जा रहा हूं और मेरा नाम रामस्वरूप है, दोस्तों रामस्वरूप सरपंच होने के साथ-साथ काफी ज्यादा समझदार भी थे और वह भूत प्रेतों के बारे में जानकारी भी रखते थे।

उन्होंने यह समझ लिया था कि जरूर कोई चुड़ैल मेरे पीछे पड़ गई है और अगर मैं रुका तो यह मुझे मार देगी, ऐसे में रामस्वरूप को बीड़ी पीने की आदत थी तो उसने अपनी बीड़ी जलाली, क्योंकि बुरी ताकते कभी भी आग के पास आपके नहीं आती है, रामस्वरूप ने पीछे मुड़कर बिल्कुल भी नहीं देखा और वह आगे बढ़ता रहा।

जैसे ही उसकी बीड़ी बुझने वाली होती वह तुरंत दूसरी बीड़ी जला लेता वह अपनी बीड़ी को बुझने बिल्कुल भी नहीं दे रहा था, और ना ही वह चुड़ैल रामस्वरूप का पीछा छोड़ रही थी। और कुछ देर बाद चुड़ैल ने देखा कि रामस्वरूप नहीं रुक रहा है ना ही पीछे मुड़ रहा है, ऐसे में चुड़ैल ने रामस्वरूप से कहा कि मैं तुम्हें जाने दूंगी तुम्हें कुछ भी नहीं करूंगी पर मुझे तुम अपने लड्डू देकर जाओ।

साथ ही चुड़ैल ने रामस्वरूप से कहा कि अगर तुम मुझे लड्डू नहीं दोगे, तो मैं तुम्हें मार दूंगी, पर रामस्वरूप बिल्कुल भी नहीं रुका और आगे बढ़ता ही चला गया, और जब रामस्वरूप अपने गांव के अंदर पहुंचा तो उस चुड़ैल ने रामस्वरूप का पीछा करना बंद कर दिया और फिर थोड़ी ही देर में रामस्वरूप अपने घर पहुंच गया।

घर पहुंचते ही रामस्वरूप नहीं चैन की सांस ली, दोस्तों इस तरह रामस्वरूप ने समझदारी दिखाते हुए उस भयानक चुड़ैल से अपना पीछा छुड़ाया, सुबह होने पर रामस्वरूप ने सभी गांव वालों से अपनी आपबीती कहीं, तो गांव वालों ने कहा कि रामस्वरूप आज तुमने साबित कर दिया, कि तुम सचमुच सरपंच बनने के योग्य हो। क्योंकि तुम काफी ज्यादा समझदार हो और तुमने अपनी सूझबूझ से उस चुड़ैल से भी अपना पीछा छुड़ाया।

अगर तुम्हारी जगह और कोई होता तो शायद ही वह जिंदा बचकर आ सकता था, दोस्तों यह कहानी एक हकीकत के ऊपर आधारित है जो कि आपको कहां तक सच्ची लगती है हमें कमेंट करके जरूर बताएं और साथ ही हमें यह भी बताएं अगर रास्ते में आपके पीछे कोई भूत पड़ जाए तो आप क्या करेंगे।

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Conclusion: आखरी शब्द

हमें उम्मीद है इस लेख के अंदर आपको जो जानकारी दी गई है वह आपको पसंद आई होगी। आज के इस लेख में हमने आपको “Bhoot ki kahani in hindi, सत्य घटनाओं पर आधारित 3 सबसे भयानक भूत की कहानियां” की पूरी विस्तार पूर्वक जानकारी दी है।

इस लेख से संबंधित अगर आपके मन में कोई भी सवाल है, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। आपकी राय हमारे लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आपकी राय ही हमें आगे और अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करती है इसलिए यहां कमेंट जरूर करें।

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