Chudail ki kahani in hindi: सच्ची घटना पर आधारित चुड़ैल की कहानी हिंदी में पढ़ें

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भूतों की कहानियों की श्रंखला में आज हम आपके साथ एक सच्ची घटना पर आधारित चुड़ैल की कहानी बताने जा रहे हैं, पर अगर आपका दिल कमजोर है आपको भूतों से डर लगता है तो ऐसे में आपको हमारी इस कहानी से दूर रहना चाहिए,

पर यदि आप भूतों में विश्वास करते हैं और भूतों की कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं, भूतों के बारे में जानकारी रखना चाहते हैं, तो आपको हमारी  chudail ki kahani को पूरा अवश्य पढ़ना चाहिए, क्योंकि आज के इस लेख में हमने आपके साथ एक ऐसी चुड़ैल वाली कहानी साझा की है।

जिसमें एक लड़की अपनी ही सहेली के ऊपर काला जादू कर देती है और काला जादू के जरिए वह अपनी ही सहेली के ऊपर एक चुड़ैल का साया छोड़ देती है, और चुड़ैल उस लड़की के शरीर के कुछ भाग को आग से जला भी देती है,

Chudail ki kahani in hindi

पर आखिर में वह लड़की उस चुड़ैल से निजात भी पाती है, यह सब कैसे होता है, कैसे वह चुड़ैल उस लड़की के शरीर को जलाती है और वह लड़की उस चुड़ैल के साए से कैसे बचती है, यह पूरी कहानी आपको हमने तीन भागों में बताई है जिसका पहला भाग यहां हम आपके साथ साझा कर रहे हैं।

चुड़ैल का साया (भाग 1)

Chudail ki kahani: दोस्तों जैसा कि हमने आपको बताया यह कहानी पूरी तरह से एक सत्य घटना पर आधारित है पर इस कहानी में किरदारों के नाम काल्पनिक रखे गए हैं ताकि जिसके साथ यह घटना घटी है उनकी पहचान छुपाई जा सके, तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं आखिर क्या है चुड़ैल का साया का सच।

हमारी कहानी की शुरुआत होती है साल 2011 से जिसमें एक लड़की जिसका नाम “गुनगुन” होता है वह अपनी 11वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही होती है, और उसकी कक्षा में उसकी एक काफी अच्छी सहेली थी जिसका नाम “फातिमा” रहता है,

फातिमा एक गरीब घर की लड़की है, जो कि धर्म से मुसलमान है और वहीं दूसरी तरफ गुनगुन एक हिंदू परिवार से ताल्लुक रखती है साथ ही गुनगुन का परिवार काफी ज्यादा पैसे वाला होता है, जिसके चलते गुनगुन हमेशा अपने साथ स्कूल में काफी अच्छा खाना लेकर जाया करती थी और वहीं दूसरी तरफ फातिमा अपने टिफिन में दो सूखी रोटी और साथ में थोड़ा सा अचार लेकर जाती थी,

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फातिमा अक्सर गुनगुन को देखा करती थी कि वह रोज स्कूल में साफ-सुथरे और नए कपड़े पहन कर आती है साथ ही वह रोजाना अलग अलग तरह का खाना लेकर आती है, ऐसे में फातिमा गुनगुन से कहीं ना कहीं ईर्ष्या करने लगी थी, पर एक दिन फातिमा ने सोचा कि क्यों ना मैं गुनगुन से दोस्ती कर लूं और फिर मैं इसके टिफिन का खाना भी खा सकती हूं।

इसके बाद फातिमा ने धीरे-धीरे गुनगुन के साथ अपने संबंध अच्छे करने शुरू किए और देखते ही देखते कुछ ही दिनों में गुनगुन और फातिमा में अच्छी दोस्ती भी हो गई और वह दोनों एक दूसरे के घर आने जाने भी लगी थी।

फातिमा जब गुनगुन के घर जाती तो वह उससे काफी ज्यादा जला करती थी और मन ही मन सोचती थी कि गुनगुन काफी पैसे वाले घर की लड़की है पर मेरे पास तो कुछ भी नहीं है, साथ ही यहां हम आपको बता दें फातिमा के पिता काला जादू जानते थे और वह लोगों के शरीर से भूत प्रेत उतारने का काम किया करते थे।

फातिमा ने भी अपने पिता का साथ देने के लिए उनसे काला जादू सीख लिया था, ऐसे में 1 दिन फातिमा ने सोचा कि अगर मैं गुनगुन को अपने बस में कर लूं तो मैं उससे जितना चाहे उतना पैसा निकाल सकती हूं। ऐसे में एक दिन फातिमा अपने साथ स्कूल टिफिन में सेवई वाली खीर बनाकर ले गई जिसमें उसने गुनगुन को वश में करने के लिए उस खीर में कुछ ऐसा मिला दिया था,

जिससे कि गुनगुन पूरी तरह से फातिमा के वश में हो जाए, इसके बाद फातिमा स्कूल पहुंचकर गुनगुन से कहने लगी आज मेरा जन्मदिन है और आज मैं तुम्हारे लिए सेवई वाली खीर बनाकर लाई हूं जिसे तुम्हें खाना पड़ेगा। गुनगुन यह सुनकर खुश होती है और उसे हैप्पी बर्थडे भी विश करती है, और कहती है अच्छा ठीक है मैं तुम्हारी यह सेवई वाली खीर खा लेती हूं और तुम मेरे टिफिन का खाना खा लो, 

 

इस तरह बड़ी चालाकी के साथ फातिमा गुनगुन को वह सेवई वाली खीर खिला देती है, और वह खीर खाने के बाद गुनगुन फातिमा के ऊपर अपने परिवार वालों से भी ज्यादा भरोसा करने लगती है, वहीं फातिमा उसके भरोसे का फायदा उठाकर धीरे-धीरे उससे पैसों की मांग करने लगती है,

और फातिमा की मांग पूरी करने के लिए गुनगुन घर से पैसे चुरा कर फातिमा को देने लगी, यह सिलसिला काफी दिनों ऐसे ही चलता रहा पर आगे जाकर फातिमा का लालच काफी ज्यादा बढ़ चुका था, उसने एक दिन सोचा कि मैं कब तक इससे इस तरह थोड़े थोड़े पैसे निकालती रहूंगी, मुझे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे कि मैं इसके परिवार को पूरी तरह से कंगाल करके उनका सारा पैसा लूट सको।

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यह सोचते सोचते फातिमा के मन में एक ख्याल आया कि उसके अब्बा ने एक चुड़ैल को मटकी में बंद करके रखा है और वह चुड़ैल उसके अब्बा का हर कहां मानती है, और क्यों ना मैं अब्बा को कह कर इसके ऊपर उस चुड़ैल को छोड़ दूं, जिससे मैं इसके घर वालों को डरा कर उससे सारा पैसा निकाल सकती हूं।

इसके बाद फातिमा अपने अब्बा को गुनगुन के बारे में पूरी कहानी बता देती है, इसके बाद फातिमा के अब्बा गुनगुन के बारे में जानकर उनके भी मन में लालच जन्म ले लेता है, क्योंकि वह पहले से ही भूत प्रेत का डर दिखाकर लोगों से पैसा निकालने का काम किया करते थे और वह काला जादू भी पूरी तरह से जानते थे,

ऐसे में फातिमा के अब्बा ने फातिमा से कहा कि बेटा मैं तुम्हें एक गुड़िया दे रहा हूं, जिसे तुम्हें गुनगुन को देना है और उससे कहना है कि इसे तुम्हें अपने घर के बीचो-बीच मिट्टी के नीचे दबा देना है और जब तुम इसे मिट्टी में दबाती हो तो कोई भी तुम्हें देखना नहीं चाहिए और यह बात तुम्हें किसी से भी नहीं कहनी है,

इसके बाद फातिमा अपने अब्बा की यह बात सुनकर उनका कहा कर देती है और वह गुड़िया ले जाकर गुनगुन को दे देती है, और जैसा की आप सभी को पता है गुनगुन फातिमा के वश में हो चुकी थी और वह फातिमा की बात मानते हुए उसने उस गुड़िया को अपने घर में ले जाकर बीचो-बीच जमीन के नीचे दफना दिया,

इसके बाद फातिमा के अब्बा ने उस चुड़ैल को आदेश दिया कि तुम्हें गुनगुन के घर जाना है और उसके पूरे परिवार वालों को डराना है, और गुनगुन के शरीर को पूरी तरह से अपने वश में करना है, इसके बाद चुड़ैल अपने मालिक का कहा मान कर गुनगुन के घर चले जाती है और गुनगुन के शरीर में प्रवेश कर लेती है।

अब धीरे-धीरे चुड़ैल ने गुनगुन के शरीर में अपना कब्जा करना शुरू कर दिया था, और अब ऐसे में गुनगुन पूरे परिवार से अलग अलग सी रहने लगी थी जिसे देख कर उसके परिवार वाले काफी ज्यादा चिंतित भी रहने लगे थे कि आजकल इस लड़की को क्या हो गया है ना तो यह ठीक से खाती है और ना ही किसी से बोलती है।

गुनगुन ने अब स्कूल जाना भी बंद कर दिया था, अब इसके कुछ दिनों बाद जब रात को घर में सब सो जाते थे वह चुड़ैल रोया करती थी और गुनगुन के परिवार वाले रोने की आवाज सुनकर रात को बाहर आकर देखते थे कि यह कौन हो रहा है साथ ही वह जब सब सो जाते थे तो वह सब के गीत जोर-जोर से बजाया करती थी।

इस तरह वह गुनगुन के घरवालों पर अपना डर बना रही थी, धीरे-धीरे उस चुड़ैल ने अपना डर बढ़ाने के लिए अब वह रात को रसोई घर के बर्तन रसोई से बाहर फेंकने लगी थी साथ ही अब उनके घर में पत्थर भी बरसने लगे थे, जिसे देखकर गुनगुन के घरवाले पूरी तरह से डरे डरे से रहने लगे थे।

और वहीं दूसरी तरफ गुनगुन अग्लो की तरह रहने लगी थी और वह एक ही बार में 10 जनों का खाना भी खा जाती थी जिसे देख कर उसके घर वाले अब काफी ज्यादा चिंतित हो गए थे और सोचने लगे कि हमें अब इस घर को छोड़ देना चाहिए यहां किसी भूत प्रेत का साया आ चुका है।

इतना सब होने के बाद 1 दिन फातिमा गुनगुन से मिलने के लिए उसके घर पहुंची, और गुनगुन की मां से पूछने लगी कि आप गुनगुन को स्कूल क्यों नहीं भेज रहे हो, ऐसे में गुनगुन की मां ने उसे अपनी पूरी कहानी बताई और कहा कि गुनगुन अब पागलों की तरह करने लगी है जरूर उसके ऊपर किसी भूत प्रेत का साया मंडरा रहा है।

यह सुनकर फातिमा अब मन ही मन खुश होने लगी थी और उसने गुनगुन की मां से कहा कि आप चिंता ना करें मेरे पिताजी इस तरह के भूत प्रेतों को भगाने का काम करते हैं आप एक बार उन्हें गुनगुन को जरूर दिखाएं, यह सुनकर गुनगुन की मां काफी ज्यादा प्रसन्न हुई और वह गुनगुन और गुनगुन के पिताजी को अपने साथ लेकर फातिमा के अब्बा के पास पहुंचे।

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Chudail Wali kahani का अगला भाग पढ़ें

दोस्तों चुड़ैल का साया कहानी का भाग 1 यहां संपूर्ण होता है इसकी आगे की कहानी मैं आप जानेंगे कि किस तरह फातिमा के अब्बा गुनगुन के परिवार वालों से पैसा लूटते हैं और किस तरह वह अपना दबदबा गुनगुन के परिवार वालों पर बनाते हैं साथ ही क्या गुनगुन के परिवार वाले फातिमा और उसके अब्बा का सच जान पाएंगे, यह जानने के लिए आपको हमारा चुड़ैल का साया भाग 2 पढ़ना होगा।

Chudail ki kahani in hindi [भाग 2]

फातिमा के अब्बा को अपनी पूरी आप बीती बताते है, जोकि फातिमा के अब्बा को पहले से ही पूरी जानकारी थी, फातिमा के अब्बा गुनगुन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद गुनगुन के माता-पिता से कहते हैं कि मैं इसका इलाज कर दूंगा पर इसके लिए आपको कुछ पैसा खर्च करना पड़ेगा क्योंकि इसके ऊपर एक चुड़ैल का साया है जिसे हटाने के लिए मुझे काफी ज्यादा सामग्री की आवश्यकता होगी।

और यह सब सुनकर गुनगुन के माता-पिता घबरा गए और उन्होंने कहा कि ठीक है जितना भी पैसा लगेगा हम खर्च करेंगे पर हमारी बेटी को उस चुड़ैल से मुक्ति दिलाएं, इसके बाद फातिमा के अब्बा ने गुनगुन के पिताजी से कहा कि आपको मुझे ₹50000 देने होंगे ताकि मैं गुनगुन का इलाज शुरू कर सकूं।

ऐसा कहते ही गुनगुन के पिता ने तुरंत ही उन्हें अपने पास से ₹50000 दे दिए, इसके बाद फातिमा के अब्बा ने एक ताबीज बनाकर गुनगुन के हाथ में बांध दिया और कहा कि अब आप चिंता ना करें, यह जल्द ही स्वस्थ हो जाएगी, दोस्तों इसके बाद गुनगुन के माता-पिता वहां से अपने घर आ गए और इसके बाद कुछ दिन गुनगुन बिल्कुल स्वस्थ रहने लगी और स्कूल भी जाने लगी।

पर लगभग 1 महीने बाद फिर से रात को घर में किसी के रोने की आवाजें आने लगी, रसोई घर के बर्तन अपने आप गिरने लगे, गुनगुन की तबीयत फिर से खराब हो चुकी थी, ऐसे में उनके माता-पिता गुनगुन को लेकर फिर से फातिमा के अब्बा के पास पहुंच गए,

और उनसे कहा कि आपने जो इलाज किया था उससे कुछ दिन तो सब सही रहा, पर अब फिर से वही सब होने लगा है जो कि पहले हो रहा था, यह सुनकर फातिमा के अब्बा ने कहा कि वह चुड़ैल काफी ज्यादा चालाक है मैंने उसे बांध दिया था पर वह मेरे पास से आजाद हो गई है, उसे वापस काबू में करने के लिए मुझे फिर से मंत्र तंत्र का प्रयोग करना होगा और उसके लिए आपको मुझे इस बार ₹100000 देने होंगे,

ताकि मैं उस चुड़ैल से आपको हमेशा के लिए मुक्ति दिला सकूं, यह बात सुनकर गुनगुन के पिता उसकी बातों के जाल में फंस गए और उन्होंने उसे ₹100000 लाकर दे दिए, पर इस बार भी गुनगुन 1 महीने ही सही रही, उसके बाद फिर से उसे उस चुड़ैल ने जकड़ लिया और घर में उथल-पुथल होना भी शुरू हो चुकी थी, 

पर इस बार गुनगुन के पिता समझ चुके थे, की फातिमा के पिता हमसे सिर्फ पैसा लूट रहे हैं इसका कोई इलाज नहीं कर रहे हैं, अब वह फातिमा के अब्बा के पास इलाज ना करवाकर बल्कि किसी और जगह इलाज करवाने की सोच ली। 

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ऐसे में अब वह भूत प्रेत भगाने वाले व्यक्ति की तलाश करने लगे और उन्होंने अपने जानकारों से कुछ जगहों के बारे में जानकारी हासिल की, इसके बाद वह लगभग 6 महीने तक एक जगह से दूसरी जगह दूसरी जगह से तीसरी जगह अपनी बेटी को लेकर भटकते रहे पर उन्हें कहीं भी अच्छे रिजल्ट नहीं मिल रहे थे।

एक दिन उन्होंने अपनी आपबीती अपने एक खास मित्र के साथ साझा की, और उनके मित्र ने उनके पिता से कहा कि आपने मुझे यह बात पहले क्यों नहीं बताई आपको अपनी बेटी के इलाज में एक भी रुपया लगाने की जरूरत नहीं है मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के पास लेकर चलता हूं, जो आपको बिना पैसों में सही इलाज देगा।

यह सुनकर गुनगुन के पिता बोले कि ठीक है इतना सब कुछ कर ही लिया है तो एक बार उनके पास भी जाकर देखते हैं, ऐसे में अब वह अपनी बेटी को लेकर अपने मित्र के साथ उस बुजुर्ग व्यक्ति के पास जाते हैं, उस बुजुर्ग व्यक्ति का नाम “राम स्वरूप” था, और रामस्वरूप के शरीर में कुछ अच्छी हवाएं आती थी जिन्हें हम “प्रेत” कहते हैं।

और रामस्वरूप के शरीर में जो प्रेत आत्माएं आती थी, वह उसके अपने बुजुर्गों की थी जो कि अब मरने के बाद प्रेत आत्माएं बन चुकी थी, ऐसे में रामस्वरूप जी ने उस लड़की के सिर पर हाथ फेरा और मन में अपने बुजुर्ग देव को याद किया, तो उनके शरीर में तुरंत उनकी बुजुर्ग आत्माओं ने प्रवेश किया और गुस्से में आकर गुनगुन के पिता से कहा कि तुमने अब बहुत देर कर दी है, 

क्योंकि इसके ऊपर इसी की सहेली ने एक चुड़ैल का साया छोड़ा हुआ है उस चुड़ैल ने आपकी बेटी के शरीर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है एक तरह से देखा जाए तो अब आपकी बेटी 50% मर चुकी है, अब आपके सामने सिर्फ उसका शरीर है उसकी आत्मा तो कैद हो चुकी है,

अब ऐसे में इसका बचना थोड़ा मुश्किल हो गया है, यह बात सुनकर गुनगुन के पिता रोने लगे और उन्होंने उस पवित्र प्रेत आत्मा से विनती की कि आप जो चाहेंगे मैं वह करने को तैयार हूं, पर आप मेरी बच्ची को बचा लीजिए, इसके बाद उस प्रेत आत्मा ने कहा कि आप पहले ही काफी ज्यादा खर्चा कर चुके हैं क्या आप उसे भूल गए,

आप काफी पैसे लगा चुके हैं पर क्या आपको फायदा मिला अब ऐसे में आप मुझे भी लालच दे रहे हैं, यह सुनकर गुनगुन के पिता ने उनसे माफी मांगी और कहा कि महाराज आप जो कहेंगे मैं वही करूंगा पर आप मुझे सही रास्ता दिखाएं, फिर उस प्रेत आत्मा ने कहा कि आप अपनी बेटी को लेकर जिस मुसलमान के पास इलाज करवाने गए थे और जिसने आपसे पैसे लूटे हैं उसी ने इसके ऊपर चुड़ैल का साया छोड़ा है।

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पर मेरी ताकत उसके मंत्र तंत्र से काफी कम है तो मैं इसका इलाज नहीं कर सकता, पर मैं उसे रोकने की कोशिश कर सकता हूं, ताकि आपकी बेटी को ज्यादा हानि ना पहुंचे, ऐसे में आपको एक ऐसे इंसान की तलाश करनी होगी जो कि आपकी बेटी का इलाज कर सके, और यह काम आपको जल्द से जल्द करना होगा नहीं तो आप अपनी बेटी को खो देंगे।

यह सुनकर गुनगुन के पिता फूट-फूटकर जोर जोर से रोने लगे और प्रेत आत्मा से विनती करने लगे अब आप ही मुझे कोई सही रास्ता दिखाएं, इसके बाद उस प्रेत आत्मा ने कहा कि मैं आपके साथ खड़ा हूं आप चिंता ना करें, पर कोशिश तो आपको ही करनी पड़ेगी, आप कोशिश कीजिए अपने जानकारों में ही आपको कोई ऐसा व्यक्ति जरूर मिलेगा जो कि आपकी बेटी गुनगुन का इलाज कर सकेगा।

इसके बाद प्रेत आत्मा ने गुनगुन के झाड़ा लगाया और उसके एक ताबीज बांदा साथ ही जो फातिमा के अब्बा ने गुनगुन के ताबीज बांधा था, उसे खोल कर फेंक दिया, और अब गुनगुन की पिता अपने घर वापस आ चुके थे, ऐसे में वहां फातिमा के अब्बा को यह पता चल चुका था कि गुनगुन के शरीर पर बंधा हुआ ताबीज अब हट चुका है,

और उन्होंने अब गुस्से में आकर गुनगुन का एक पुतला बनाया और अपनी चुड़ैल को आदेश दिया कि तुम्हें मेरा संदेश गुनगुन के पिता तक पहुंचाना है, ऐसे में उस चुड़ैल ने अपने मालिक का कहा मान कर गुनगुन के शरीर में प्रवेश किया और उनके पिता से कहा कि मैं इसे अब नहीं छोडूंगी, तुमने आज इसका ताबीज खोलकर इसकी मौत को बुला लिया है अगर तुमने मेरे मालिक को पैसा नहीं पहुंचाया तो तुम अपनी बेटी की जान से हाथ धो बैठोगे,

ऐसे में उनके पिता भी अब हार चुके थे और उन्होंने उस चुड़ैल से कहा कि तुम्हें जो करना है कर लो मैं अब उस ढोंगी को ₹1 भी नहीं दूंगा, ऊपर वाला सब देख रहा है अब वही इंसाफ करेगा, इसके बाद चुड़ैल अपने मालिक से जाकर पूरी कहानी कह देती है और यह सब सुनकर फातिमा के अब्बा गुस्से में आ चुके थे और उन्होंने जो गुनगुन का पुतला बनाया था उसके अंदर सुइयां चुभना शुरू कर दिया,

और जैसे-जैसे गुनगुन के पुतले में वह सुइयां चुभता तो वहा गुनगुन के शरीर में दर्द होता और ऐसे ही रात के वक्त गुनगुन और उसके परिवार वाले छत पर बैठे बात कर रहे थे, तभी फातिमा के अब्बा को पैसा ना मिलने पर उन्होंने गुनगुन के पुतले में आग लगा दी, और जैसे ही वह पुतला जलने लगा वहां गुनगुन के कपड़ों में अचानक आग लग गई, यह देख सब घबरा चुके थे।

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Chudail Wali kahani का अगला भाग पढ़ें

क्या गुनगुन के परिवार वाले गुनगुन को बचा पाए, क्या फातिमा के अब्बा गुनगुन को मारने में कामयाब रहे, या फिर क्या उन्हें ऐसा कोई व्यक्ति मिला जो गुनगुन का इलाज कर सके, यह पूरी कहानी पढ़ने के लिए अब आपको हमारे चुड़ैल वाली कहानी के अंतिम भाग को पढ़ना होगा।

Chudail wali kahani in hindi: [अंतिम भाग]

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फातिमा के अब्बा को जब गुनगुन के परिवार की तरफ से कोई भी रिस्पांस नहीं मिल रहा था तो ऐसे में गुस्से में आकर फातिमा के अब्बा ने गुनगुन के पुतले में आग लगा दी, और जब फातिमा के अब्बा ने गुनगुन के पुतले में आग लगाई तो वहां दूसरी तरफ गुनगुन के शरीर में काफी ज्यादा जलन होने लगी और वह जोर जोर से चिल्लाने लगी।

गुनगुन कहने लगी मेरे शरीर में आग लग रही है मुझे काफी ज्यादा जलन हो रही है, तभी उसके परिवार वाले सभी उठकर उसके पास पहुंचे और उन्होंने गुनगुन को संभाला और देखते ही देखते, कुछ ही देर में गुनगुन के कपड़े जलने लगे, यह देखकर हर कोई सहम गया था, 

ऐसे में उन्हें एक चीज का बहुत फायदा हुआ कि जिस वक्त गुनगुन के शरीर में आग लगी थी वह छत पर थी और छत पर उस वक्त पानी की टंकी भरी हुई थी, उन्होंने उस टंकी को उठाया और गुनगुन के ऊपर पूरा पानी डाल दिया, जिससे गुनगुन के शरीर में लगी आग बुझ गई थी, पर गुनगुन ने जो कपड़े पहने थे वह उसकी चमड़ी से चिपक चुके थे, जोकि उसे काफी ज्यादा दर्द दे रहे थे।

ऐसे में उनके परिवार वालों ने तुरंत ही गुनगुन को अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया, और गुनगुन की अच्छी किस्मत के चलते उसका शरीर ज्यादा नहीं जला पर शरीर के कुछ हिस्सों की चमड़ी जल चुकी थी, और जिसके लिए डॉक्टर ने कहा कि हम प्लास्टिक सर्जरी के जरिए इसकी यह चमड़ी सही कर देंगे,

अब ऐसे में इस बात का पता गुनगुन के सभी रिश्तेदारों को चला और सभी उससे मिलने अस्पताल में आने लगे, तभी गुनगुन के चाचा की लड़की जिसकी शादी हो चुकी थी वह अपने पति को लेकर अस्पताल में पहुंची, और अस्पताल पहुंचकर गुनगुन की बहन ने उसके पिता से पूछा कि बड़े पापा क्या हुआ गुनगुन के शरीर में आग कैसे लगी, 

यह सुनकर गुनगुन के पिता रोने लगे और उन्होंने अपनी पूरी कहानी अपने भाई की लड़की के साथ साझा की, यह सुनकर गुनगुन की बहन बोली कि आपको मुझे यह बात पहले बतानी चाहिए थी, तो यह सब शायद नहीं होता, ऐसे में उनके पिता ने कहा कि मैंने पहले ही सब कुछ कर के देख लिया है काफी पैसा भी लगा दिया है पर कोई फायदा नहीं मिल रहा।

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ऐसे में गुनगुन की बहन ने कहा कि मेरे ससुर के एक काफी अच्छे दोस्त हैं जिनके अंदर एक पीर बाबा की हवा आते हैं, हमें एक बार उनको दिखाना चाहिए, उन्होंने कहा कि देख लो तुम्हें जैसा सही लगे अगर वह देखने के लिए हां कहते हैं, तो उन्हें बुला लो, ऐसे में यह बात गुनगुन की बहन ने अपने पति से की, तो उसने अपने पिता को फोन लगाया और गुनगुन की पूरी कहानी उन्हें समझाइए। 

ऐसे में उसके पिता ने कहा कि ठीक है मैं अपने दोस्त से बात करके देखता हूं, अगर वह मान जाते हैं तो मैं उन्हें अपने साथ ही लेकर आता हूं, इसके बाद गुनगुन के ससुर अपने दोस्त “राधेश्याम” के पास जाते हैं और उन्हें पूरी कहानी बताते हैं, पूरी कहानी सुनने के बाद राधेश्याम अपने दोस्त से कहता है कि ठीक है मैं तुम्हारे साथ चलता हूं, अगर मेरे जरिए कुछ अच्छा होता है और उस बच्ची की जान बच जाती है तो मुझे इससे काफी खुशी होगी।

इस तरह वह दोनों अस्पताल में पहुंच जाते हैं, उस वक्त गुनगुन अस्पताल के एक आईसीयू में भर्ती थी, जहां हर कोई गुनगुन से मिलने नहीं जा सकता था सिर्फ एक ही इंसान को अंदर जाने की इजाजत मिली हुई थी, ऐसे में गुनगुन का इलाज जो डॉक्टर कर रहा था वह गुनगुन के पिता का काफी अच्छा दोस्त था, 

जिसके कारण उन्होंने अपनी डॉ दोस्त से गुनगुन के पास जाने की इजाजत ले ली, और अब गुनगुन के पिता अपने भाई की लड़की के ससुर और उनके दोस्त राधेश्याम को लेकर गुनगुन के पास पहुंच जाते हैं, वहां जाकर राधेश्याम कहता है कि जल्दी से एक कपूर और दो अगरबत्ती लाकर यहां लगाओ,

यह सुनकर गुनगुन के पिता जल्दी से अस्पताल से बाहर जाकर एक किराने की दुकान से कपूर अगरबत्ती लाकर गुनगुन के बेड के पास नीचे लगा कर बैठ जाते हैं, तब वहां राधेश्याम अपने पीर बाबा को याद करता है, तभी उसके शरीर में पीर बाबा प्रवेश करते हैं और गुस्से में आकर कहते हैं कि तुमने मुझे बुलाने में काफी ज्यादा देर कर दी है अब कुछ नहीं हो सकता।

क्योंकि जिसने भी इसके ऊपर काला जादू किया है वह अपनी सारी क्रिया कर चुका है अब इसका बचना मुश्किल है, यह सुनकर गुनगुन के माता-पिता रोने लगते हैं और उनके माता-पिता बाबा के सामने झुक जाते हैं और कहते हैं बाबा आप जो कहेंगे हम करेंगे पर हमारी बच्ची की जान बचा लीजिए।

इसके बाद पीर बाबा उनसे कहते हैं कि अगर तुम अपनी बच्ची की जान बचाना चाहते हो तो तुम्हें हर साल होली और दिवाली अपनी बेटी को लेकर मेरे स्थान पर आना होगा और वहां चद्दर चडानी होगी साथ ही मेरे स्थान की मान्यता भी लेनी होगी, तभी मैं आपकी बेटी की जान बचा सकता हूं अन्यथा आपकी बेटी तो कब की मर चुकी है।

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यह सुनकर गुनगुन के माता-पिता कहते हैं कि हम हर साल होली दिवाली आपके दर पर गुनगुन को लेकर आएंगे पर आप हमारी बेटी की जान बचा लीजिए, इसके बाद पीर बाबा वहीं बैठे बैठे गुनगुन के झाड़ा लगाते हैं और अगरबत्ती की राख उठाकर गुनगुन के शरीर पर तीन बंद लगाते हैं।

और उनके पिता से कहते हैं कि अब आपको एक हरे रंग की सवा मीटर की चादर खरीदकर लानी होगी, और उस चादर में से एक छोटा सा कपड़ा फाड़ कर उसका ताबीज बनवाकर तुम्हें अपनी बेटी के गले में बनवाना है, ताबीज मेरा गुडला बांध देगा, 

दोस्तों यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें गुडला उसे कहते हैं जिसके शरीर में दूसरी आत्माएं प्रवेश करती है यानी कि पीर बाबा राधेश्याम के शरीर में आ रहे थे इसलिए राधेश्याम पीर बाबा के लिए गुडला था,

इसके बाद पीर बाबा गुनगुन के पिता से कहते हैं कि जब गुनगुन को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है और यह उठने बैठने लगती है तभी मैं इसका पूरा इलाज कर पाऊंगा, और अभी मैं सिर्फ इसे बांधकर जा रहा हूं जिससे कि यह पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी, इसके बाद गुनगुन के पिता बाजार से हरे रंग की चादर लाकर राधेश्याम को दे देते हैं और राधेश्याम उस चादर में से ही एक छोटा सा हरे रंग का कपड़ा निकाल कर उसका ताबीज बनाकर गुनगुन के गले में बांध देता है।

और गुनगुन के पिता से कहता है कि इस चादर को आप संभाल कर अपने पास रखो और जब आप गुनगुन को पीर बाबा के स्थान पर लेकर आते हो तब यह चादर उनकी दरगाह पर चढ़ा देना।

दोस्तों इसके बाद गुनगुन के शरीर में सुधार होने लगता है और सात से आठ दिन में ही गुनगुन को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, इसके कुछ दिनों बाद जब गुनगुन सही-सही उठने बैठने लगती है तब उनके परिवार वाले गुनगुन को लेकर पीर बाबा के स्थान पर पहुंच जाते हैं और वहां राधेश्याम को भी बुला लेते हैं।

इसके बाद पीर बाबा के स्थान पर जाने के बाद वहां पीर बाबा को याद करते हैं तो राधेश्याम के शरीर में पीर बाबा प्रवेश करते हैं और पीर बाबा वहां गुनगुन का इलाज करते हैं वहां पर गुनगुन के वह झाड़ा लगाते हैं और जिस चुड़ैल ने गुनगुन के शरीर पर कब्जा कर रखा था उसी के मुंह से वहां सब के सामने पूरी हकीकत बयां करवाते हैं।

तब वही बैठे-बैठे पीर बाबा कहते हैं कि तेरा मालिक क्या मुझसे भी ज्यादा ताकतवर है तो ले जैसे उसने गुनगुन के शरीर में आग लगाई थी जा उसे जाकर संभाल अब उसके जलने की बारी है, तभी पीर बाबा वहां से अपने बाशिंदे भेज देते हैं और उधर दूसरी तरफ फातिमा के पिता के कपड़ों में आग लग जाती है और वह बुरी तरह से जल जाते हैं, 

और यहां गुनगुन को भी उस चुड़ैल से मुक्ति मिल जाती है, दोस्तों इस तरह आपने देखा कि गुनगुन किस दर्द से गुजरी है, जो दर्द उसे उसकी ही एक सहेली ने दिया था, आज गुनगुन काफी अच्छे से रह रही है उसकी शादी भी हो चुकी है और उसके दो छोटी लड़कियां भी है। पर आज भी गुनगुन पीर बाबा के स्थान पर हर साल पहुंचती है।

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आगे और पढ़ें:

चुड़ैल की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें जल्द हर किसी के ऊपर पूरा भरोसा नहीं करना चाहिए, और हमेशा किसी से भी दोस्ती करने से पहले उसके बारे में पूरी जांच पड़ताल करनी चाहिए। अगर आपको सब सही लगता है तो ऐसे में फिर आपको उससे दोस्ती करनी चाहिए और दोस्ती हमेशा घर से बाहर तक की ही रखनी चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं आपको हमारी यह कहानी काफी ज्यादा पसंद आई होगी और इस कहानी से आपको एक काफी अच्छी सीख भी मिली होगी, आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं आपको हमारी यह कहानी कैसी लगी और क्या आगे भी आप इसी तरह की सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानियां पढ़ना चाहते हैं हमें कमेंट में लिखकर बता सकते हैं।
साथ ही अगर आपके साथ कोई ऐसी घटना घटित हुई है, तो आप हमें हमारे ईमेल “kabirgyani@hotmail.com” के ऊपर मेल करके अपनी कहानी बता सकते हैं ताकि उसे हम हमारी वेबसाइट के जरिए लोगों तक पहुंचा सके, धन्यवाद।

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